Tuesday, July 21, 2015

tujhe sochte hi

तुझे सोचते ही
भूल जाती है 
दुनिया
साथ हो तो 
न जाने क्या हो
तेरी बातें सोच कर 
आ जाती है 
लबो पे 
मुस्कराहट
तू साथ चले तो 
उदास शाम भी 
गुलज़ार हो
तेरी याद से 
महकती है 
मेरी ज़ात
मेरी हर सांस
तू पास हो तो 
मेरा दिन 
मेरी रातें 
खुशगवार हो
ओ मेरे हमनशी
तू है तो 
जन्नत है 
मेरी दुनिया
तेरे बिना तो मैं 
ख़ाक हूँ

3 Comments:

At July 22, 2015 at 1:43 AM , Blogger Vijaya Bhargav said...

तुझे सोचती हू
जब सूरज की पहली किरण को
जमीन को छूते देखती हू
अपने चेहरे पे डालती हू
वे खुन्क किरण...तेरी उगली का एहसास.लेती हू
तुझे सोचती हू
सजती हू संवरती हूं
आईन् की जगह
तेरी आखे..पाती हू
मुस्कुरा के..शर्मा जाती हू
तुझे सोचती हू
जब उस पेड पे
मन्नत का धागा
बान्धती हू़ं.
तुझे पाने के लिए
जाने क्यू..तुझे पाने मे
तुझ से मिलने मे
वो गर्माहट नही
तू अपनी सी नही लगती
तेरी सोच...
वो तो मेरी है

 
At July 22, 2015 at 1:44 AM , Blogger Vijaya Bhargav said...

तुझे सोचती हू
जब सूरज की पहली किरण को
जमीन को छूते देखती हू
अपने चेहरे पे डालती हू
वे खुन्क किरण...तेरी उगली का एहसास.लेती हू
तुझे सोचती हू
सजती हू संवरती हूं
आईन् की जगह
तेरी आखे..पाती हू
मुस्कुरा के..शर्मा जाती हू
तुझे सोचती हू
जब उस पेड पे
मन्नत का धागा
बान्धती हू़ं.
तुझे पाने के लिए
जाने क्यू..तुझे पाने मे
तुझ से मिलने मे
वो गर्माहट नही
तू अपनी सी नही लगती
तेरी सोच...
वो तो मेरी है

 
At October 9, 2015 at 4:21 AM , Blogger अपर्णा खरे said...

thanks Vijaya ji..waah.. rachna pasand karne ke liye sath hi itna khoobsurat reply dene ke liye

 

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